एक चक्कर श्यामसान का

*एक चक्कर शमशान का*

जब कर न सको भरोसा किसी इंसान का,
जब हल न निकले किसी परेशानी का । 
तब अपने चित्त को शांत करो ऐ विशाल,
और लगा लो शिर्फ एक चक्कर श्यामसान का।।
 
जब भी कभी भर जाए घमण्ड से सारा दिमाग,
जब जलने लगे बदन में किसी से जलन की आग।
जब कभी परख न कर पाओ सच और ईमान का,
तो लगा लो शिर्फ एक चक्कर श्यामसान का।।

 विशाल यादव एस. के.

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