*सच और झूठ* by विशाल यादव
* सच * सच और झूठ * और झूठ * अजीब दस्तूर है इस दुनिया का झूठे खुद को खुद से बड़ा दिखाते है सच की तो ये आदत रही है ए विशाल वो तो सब कर के भी चुप रह जाते है। मैने देखे है रंग हजार तेरे महफ़िल की सब एक से बढ़कर एक नजर आते है दुनिया में झूठे लोगो को बड़े हुनर आते है सच्चे लोग तो आरोपो से ही मर जाते है। क्या इनायत क्या शिकायत क्या फर्क पड़े इन्हें किसी के रुसवाई का करना हो हासिल जिन्हें बुलंदिया वो खामोसी से अपना काम कर जाते है। यू न कर खुद के दिल को बोझिल चल एक बार फिर शिखर को पाते है अब हिम्मत हार के न बैठ इस तरह चल दुनिया को अपना हुनर दिखाते है। Writtent by :- विशाल यादव एस. के.